एक टुकड़ा आकाश एक टुकड़ा आकाश
क्या तुम एक यंत्र हो या अनथक जीवन का मंत्र हो। क्या तुम एक यंत्र हो या अनथक जीवन का मंत्र हो।
क्यों मन बिंधा सा है तुझसे, खुलती नही तुझसे जुड़ीं गांठे। क्यों मन बिंधा सा है तुझसे, खुलती नही तुझसे जुड़ीं गांठे।
इसी काश की मृग-मरीचिका में, खो देता है वो इसी काश की मृग-मरीचिका में, खो देता है वो
प्रकृति छलकाती अपना सौंदर्य समेटे सब अपने ह्रदय में। प्रकृति छलकाती अपना सौंदर्य समेटे सब अपने ह्रदय में।
वो एक तन्हा इस गगन में, तुझ जैसा और कौन? हरियाली है चारो तरफ़ पर, तुझसे सुना और कौ वो एक तन्हा इस गगन में, तुझ जैसा और कौन? हरियाली है चारो तरफ़ पर, तुझ...